हमारे दैनिक जीवन में हम जो सपने देखते हैं, वो सारे सपने कभी तो हमें क्षणभर के लिए बहुत सारी खुशियाँ दे जाते हैं, और कभी उदासीन बना जाते हैं। पर फिर भी यह मेरे जीबन में रंग भर जाते हैं। ऐसे कुछ सपनों को ले कर मैंने कुछ पंक्तियाँ लिखी है -
सपना
सपना तुम जो हो , जैसी हो
भरती सबके जीवन में रंग हो
कभी हँसाती, कभी रुलाती
कभी दोनों को, दिखाती संग - संग हो।
सपना, क्या कभी तुमने सोचा है,
अगर तुम न होती, तो आदमी कैसा होता ?
न पूरा जीता, न पूरा मरता !
अब जब तुम हो, तो है आदमी भी,
पूरा न सही पर, क्षणिक तो जी लेता है कभी - कभी ...
खुशिओ के घूंट मुंह से न सही, पर आँखों से है पीता ...
तो यही अच्छा है कि -
जीता रहे आदमी,
जीते रहे उसके सपने,
पालता रहे, वह अपनों के सपने ...
पाता रहे, वह सपनो को अपने ...
सपना
सपना तुम जो हो , जैसी हो
भरती सबके जीवन में रंग हो
कभी हँसाती, कभी रुलाती
कभी दोनों को, दिखाती संग - संग हो।
सपना, क्या कभी तुमने सोचा है,
अगर तुम न होती, तो आदमी कैसा होता ?
न पूरा जीता, न पूरा मरता !
अब जब तुम हो, तो है आदमी भी,
पूरा न सही पर, क्षणिक तो जी लेता है कभी - कभी ...
खुशिओ के घूंट मुंह से न सही, पर आँखों से है पीता ...
तो यही अच्छा है कि -
जीता रहे आदमी,
जीते रहे उसके सपने,
पालता रहे, वह अपनों के सपने ...
पाता रहे, वह सपनो को अपने ...
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